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नालंदा डीएम कुंदन कुमार ने निशा रेडीमेड गारमेंट्स का निरीक्षण किया

नालंदा डीएम कुंदन कुमार ने निशा रेडीमेड गारमेंट्स का किया निरीक्षण, टर्नओवर बढ़ाने के दिए निर्देश

दिनांक 17 जनवरी 2025 को नालंदा के जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार द्वारा भ्रमण कार्यक्रम के दौरान एकंगरसराय प्रखंड अंतर्गत तेल्हाड़ा स्थित निशा रेडीमेड गारमेंट्स का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने उत्पादन इकाई, कार्यरत कारीगरों और प्रबंधन व्यवस्था का जायजा लिया।

निरीक्षण के क्रम में कंपनी के मालिक मनोज कुमार ने बताया कि निशा रेडीमेड गारमेंट्स के उत्थान हेतु बिहार सरकार की जिला औद्योगिक नवप्रवर्तन योजना के अंतर्गत कोरोना काल वर्ष 2021 में 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP 1.0) के तहत 10 लाख रुपये तथा तीन वर्ष पूर्ण होने के पश्चात PMEGP 2.0 योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024–25 में 60 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई।

वर्तमान समय में इस गारमेंट्स यूनिट में लगभग 50 लोग कार्यरत हैं, जिनमें करीब 80 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। कंपनी का वार्षिक टर्नओवर लगभग 1.5 करोड़ रुपये बताया गया। इस पर संतोष व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने कंपनी को आगामी समय में 5 गुना अधिक टर्नओवर करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।

जिलाधिकारी ने कंपनी के मालिक मनोज कुमार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उत्पादन क्षमता बढ़ाकर और अधिक स्थानीय युवाओं एवं महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने वहां कार्यरत कारीगरों से बातचीत कर उनके प्रशिक्षण, पूर्व अनुभव, कार्यकुशलता और मासिक आय के बारे में भी जानकारी ली।

इस अवसर पर मनोज कुमार ने जिलाधिकारी के समक्ष अपने संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि वे केवल 10वीं पास हैं और आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी। शुरुआती दिनों में उन्होंने आलू-प्याज की पालदारी का काम किया, जिससे मात्र 10 रुपये प्रतिदिन की आमदनी होती थी। इसके बाद 7 मार्च 1996 को रोज़गार की तलाश में पंजाब के लुधियाना चले गए, जहां फैक्ट्री में झाड़ू लगाने से करियर की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे निटिंग क्लॉथ मशीन चलाना सीखा और मेहनत के बल पर वेतन बढ़कर 20 हजार रुपये तक पहुंच गया।

वर्ष 2014 में वे बिहार लौटे और वस्त्र उत्पादन के क्षेत्र में साझेदारी शुरू की, लेकिन दो वर्ष बाद साझेदारी टूट गई। इसके बाद उन्होंने सिलाव, नालंदा में 6 हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी की। कुछ समय बाद सहयोगियों के सहयोग से मशीनें प्राप्त हुईं और लुधियाना की कंपनियों Ricky Knit Fab एवं Aararfabric से कच्चे माल का सहयोग मिला। कोरोना काल में नवप्रवर्तन योजना और PMEGP के तहत मिली सहायता से आज निशा रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग एक सफल इकाई के रूप में स्थापित हो चुका है।

निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी हिलसा, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

यह निरीक्षण न केवल स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से ग्रामीण क्षेत्र में भी रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत मॉडल खड़ा किया जा सकता है।


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